12/17/17

Poem | Karan Mujoo


A fireworks shop in Old Delhi, closed following SC order, before Diwali this year




इस शहर में वैसे तो यह शहर
दिन भर ज़हर उगलता है,
पर कभी कभी
इसकी शाम अच्छी होती है.
बादल ऐसे की लगता है
किसी ने आसमान में
स्याही की बोतल उड़ेल दी हो.

वैसे तो इस शहर में
लोहे के दैत्य शोर मचाते रहते हैं,
पर आज यहाँ बूंदों का
मद्धम मद्धम संगीत है.

इस शहर में लोग सपने बेच के
1 BHK, 2 BHK और कभी कभी
3 BHK भी ले लेते हैं.
इस शहर में साइबर सिटी भी है
और यहाँ कन्हाई गाँव भी है.
इस शहर में CEO  भी है और चपरासी भी.
कभी कभी सोहना रोड के ट्रैफिक जाम में
इन दोनों का आमना सामना भी होता है.
एटलस साइकिल और मर्सेडीज़ एक बराबर हो जाती है.
 
इस शहर में छोटे छोटे शहरों
से आके बहुत सारे सपने रहते हैं.
जब वो टूटते हैं तो
चूड़ियों सी आवाज़ करते हैं.
इस शहर में बूढ़े लोग घरों में रोते हैं
और जवान लोग दफ्तरों में.

अगर आप बोर हो रहे हैं
तो इस शहर में एक जैसे दिखने वाले mall भी हैं.
जहा जाके आप capitalism की मूर्ति पे
पैसे की माला चढ़ा सकते हैं.
इस शहर में ताऊ DLF को ज़मीन बेच के
करोड़पति बन गया है, पर अभी भी वो भैंस
के सामने बैठ कर हुक्का पीता है.
    
इस शहर के ड्राइवर रोज़
मौत के साथ दौड़ लगते हैं.
इस शहर में प्यार सहारा mall
के बाहर उदास बैठा रहता है,
आप चाहे तो उसे खरीद सकते हैं.

इस शहर में  Kunskapsskolan
भी है और चाइल्ड लेबर भी है.
इस शहर में सपने भी है और दुखड़े भी हैं.

खैर जैसा भी है, मेरा शहर है
और आज यहाँ की शाम अच्छी है.

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